Thursday, October 3, 2024

kavita ki paati


न जाने कैसा दिन कहूँ ? पर आज मुझसे मेरी एक करीबी चीज़ बिछड़ गई है ...
नहीं मालूम कि फिर मुझे वह मिल भी पाएगी कि नही  फिर भी इल्तजा है खुदा से , खुद को ढूंढने की कशिश में जुडी वो कविता की पाती.....
अब भी इच्छा है कि मेरा वो कविता संग्रह मुझे वापिस मिल जाए ...
मैं आज पूरा दिन दुखी थी , पूरा दिन ये दिल रोता रहा...माँ और पिताजी ने कहा कि अदनी सी कविता पाती के लिए खुद का यह हाल किया है??? कैसे समझाती उन्हें ?? कैसे बताती उन्हें कि कितनी दिल को अजीज़ थी वो मुझे ???? कितनी दिल के  करीब थी वो मेरे पर अंततः मैंने खुद को समझाया और इस गम की आहुति के लिए मैंने एक कविता लिखी ....