Sunday, September 23, 2012

vishwas


विश्वास.......
 
जो मन में हो विश्वास तो हस्ती नहीं अँधेरे की ऐसी जो रौशनी के वजूद को ढांप सके ,
लाचारियत से जी रही दुनिया में खुद पर हो विश्वास गर तो हस्ती नहीं किसी की कि आपको ज़िल्लत से जीने को मजबूर कर सके,
सपने हो इतने बड़े कि सच हो जाएं तो वास्तविकता भी हम पर नाज़ कर सके ....

Saturday, September 22, 2012

कृतियाँ जो खो गईं....


कुछ दिनों से मैंने कुछ लिखा नहीं,
शायद कुछ दिनों से मुझे कुछ जांचा नहीं ,
जो अब मुझे जांचा था कुछ ,
तो लिखने की पाती मेरे हाथ में रही नहीं ,
वो कविताएँ जो खुद की तलाश में लिखी थी मैंने ,
वो मेरी तकदीर में रही नहीं ,
कभी सोचूं कि दुःख की वजह है यही ,
पर फिर लगता है कि लेखनी को कोई रोक सकता नही ,
गर अख्तियार कर सकूं फिर से लिखने का फैसला ,
तो हो सकता है कि पुराना तो पा सकूं नहीं,
पर नयी कृतियाँ तो सोच से गईं नहीं ......


आपकी टिप्पणियां और विश्लेषण का अभूतपूर्व स्वागत है....
नमस्कार 
सस्नेह 
आपकी शुभाकांक्षी 
निशु गुप्ता 
कही .... अनकही .....


my diary

अब से मैं चाहती हूँ कि आप सभी से मैं अपनी कविताएँ साझा करूँ l आप अपनी टिप्पणी व विश्लेषण ज़रूर डालें ताकि म अपनी लेखन विधा को और अधिक परिष्कृत कर सकूं 
कविता की पहली किश्त या पहली कविता l 
मैं अपनी कविताओं को शीर्षक देना पसंद नही करती हूँ l आप चाहें तो कविताओं को शीर्षक भी दे सकते हैं l  
ऐसा करने के पीछे कारण यह है कि मेरी एक अनमोल डायरी कुछ वक़्त पहले खो गई....
उसमे मेरे द्वारा लिखी हुई बहुत सी कविताएँ थी ....
कैसा  महसूस हुआ वह आपसे साझा करना चाहती हूँ ...