Saturday, September 22, 2012

कृतियाँ जो खो गईं....


कुछ दिनों से मैंने कुछ लिखा नहीं,
शायद कुछ दिनों से मुझे कुछ जांचा नहीं ,
जो अब मुझे जांचा था कुछ ,
तो लिखने की पाती मेरे हाथ में रही नहीं ,
वो कविताएँ जो खुद की तलाश में लिखी थी मैंने ,
वो मेरी तकदीर में रही नहीं ,
कभी सोचूं कि दुःख की वजह है यही ,
पर फिर लगता है कि लेखनी को कोई रोक सकता नही ,
गर अख्तियार कर सकूं फिर से लिखने का फैसला ,
तो हो सकता है कि पुराना तो पा सकूं नहीं,
पर नयी कृतियाँ तो सोच से गईं नहीं ......


आपकी टिप्पणियां और विश्लेषण का अभूतपूर्व स्वागत है....
नमस्कार 
सस्नेह 
आपकी शुभाकांक्षी 
निशु गुप्ता 
कही .... अनकही .....


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