प्यारे बच्चों,
यह पत्र आप सभी को लिख रही हूँ , सिर्फ़ इसीलिए नहीं कि आज बाल दिवस है और न ही इसलिए कि बचपन का उत्सव मनाने की कितनी ज़रुरत हम सभी को है , ऐसा बताने के लिए बल्कि इसलिए कि आपका होना ही है जो हमारे होने के अस्तित्त्व के लिए भी ज़रूरी है। जीवन की सभी मुश्किलों में जब हम बड़े हो जाने की जटिलताओं में फँस जाते हैं तो ये आप ही हैं जो हमें हमारे होने को सार्थक करते हैं , हमें फिर से सजीव करते हैं।अपनी किलकारियों से , अपनी एक सकारात्मक मुस्कान से , अपनी जिज्ञासाओं से , आपके दुनिया को देखने - समझने के तरीकों से।
आप को अक्सर लगता रहा होगा कि आप बच्चे हैं इसलिए आप की कौन सुनता है पर वास्तव में अब ऐसा वक़्त नहीं है और आप ऐसे विद्यालय का भी हिस्सा हैं जो आपको अपने विचार रखने की पूरी आज़ादी देता है। मेरा कहना आपसे यह है कि बड़े हो जाना या बड़े होने की प्रक्रिया से जिस तरह आपको प्यार है कभी मुझे भी था लेकिन सच यह भी है कि मनुष्य हमेशा जो उसके पास नहीं होता उसे ही पा लेना चाहता है। मैं पहले बड़े हो जाने को पा लेना चाहती थी और आज अक्सर वापिस बच्चा बन जाने की 'काश!' में फँसी - फँसी रह जाती हूँ।
मैं आप से यह भी कहना चाहती हूँ कि अक्सर हम आगे आने वाले के प्रति इतना बेचैन रहते हैं कि आज हम क्या हैं उस पर ध्यान ही नहीं देते। तो, मेरे प्यारे बच्चों ख़ुद को बड़ा होने दो और बड़े होते देखो लेकिन खुद के बच्चा होने को मत खोना। उसे ख़ुद में ज़िंदा रहने देना बहुत ज़रूरी है। बचपन ही केवल ऐसी अवस्था है जो उम्र के किसी भी पड़ाव को आपको आपके संघर्षों और समस्याओं में से पल भर में निकल पाने का रास्ता सुझाती है।
मैं पिछले लगभग 13 सालों से सीखने - सिखाने की प्रक्रिया में हूँ पर यक़ीन मानिए कि आपसे बहुत कुछ सीखती रही हूँ और दुनिया भर की परेशानियों के होने के बावजूद भी जब आप सभी से मिलती हूँ तो ख़ुद में एक नई सी ऊर्जा का संचार पाती हूँ। आप सभी के बीच मेरा होना मुझे एक सिर्फ़ शिक्षिका नहीं होने देता था और मेरे अपने अस्तित्त्व को बने रहने देता रहा है। आज तक जितने भी बच्चों से सीखने और मिलने का मुझे मौक़ा मिला है, मैं उन सभी की आभारी ताउम्र रहूँगी।
साथ ही, आपकी यह दोस्त आप सभी से बराबर स्नेह रखती है और आप सभी को वर्तमान और भविष्य में नए - नए कीर्तिमान रचते देखना चाहती है। उम्मीद है कि आप और हम मिलकर इस दुनिया को सभी के लिए रहने लायक जगह बने रहने में हमेशा मदद करेंगे।
आज जब मैं विद्यालय में पढ़ाने से वंचित हूँ और शिक्षक - शिक्षिकाओं से उनके सीखने - सिखाने की प्रक्रिया से जुड़ी हुई हूँ, तो आपके साथ शिक्षिका के रूप में प्राप्त हुआ अनुभव मुझे अपने काम करने के तौर - तरीक़ों और सीखने - सिखाने के तौर तरीक़ों को शिक्षकों के लिए बेहतर बनाने में मदद कर रहा है।
और हाँ, पहले भी आप सभी को कहा है और आज फिर से इस पत्र में लिख भी रही हूँ कि आप सभी कभी भी मुझ तक अपनी बात पहुँचा सकते हैं और विश्वास रखें कि आप सभी को मैं पूरे धैर्य के साथ सुनूँगी और समझूँगी क्योंकि मैं भी आप ही की तरह आज भी एक बड़ी बच्ची हूँ।
आप सभी को स्नेह और नया सीखते रहने के सुझाव के साथ, इस बाल दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएँ !!
सस्नेह
निशु
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