Wednesday, April 9, 2025

ek chhoti si khidki

एक छोटी सी खिड़की,
कितनी ही बड़ी होगी?
उतनी बड़ी जिससे एक पक्षी दिख सके,
एक पेड़ की एक नहीं दो नहीं कई डालियां दिख सके
और तो और पूरा पेड़ ही दिख सके
फिर ज़रा दूर छोटे बड़े मकानों का गुच्छा दिख सके
फिर और पेड़ों के झुरमुट में कलरव करते पंछी दिख सके
एक सुंदर गोल चमकता, गर्मियों में आग बरसाता 
और सर्दियों में ताप देता सूरज दिख सके
उस खिड़की में रास्ते पर चलती गाड़ियां, लोग, रेहड़ियां, बस ऑटो दिख सके,
उस खिड़की में जो प्रत्यक्ष दिखता है वो तो दिख ही सके
पर दिख सके अतीत की यादों का टोकरा और भविष्य को टटोलता मन मेरा 
खिड़की छोटी भले ही हो
लेकिन दृश्य परिदृश्य अनंत दिख सके 

No comments:

Post a Comment