तेरी आँखें मुझे नहीं देखती तब मैं उन्हें देखती हूँ शायद तुमने मुझे देखा होगा उन्हें निहारते मैं उलझन चाहती हूँ इनसे पर सुलझन का टेप लिए तुम हर बार आ जाते हो बचाने सस्नेह निशु
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