Friday, November 2, 2012

यादों का अफ़साना...........

यादों का अफ़साना............
यादें अफसाना है रंग - बिरंगे तरानों का,
ताउम्र जूझती सूझती ज़िन्दगी के अल्फाजों का,
कभी तुम्हारी - हमारी दोस्ती को जो लौटा देती यादें,
तो दिल को छू जाती वो यादें,
वक़्त के पहलुओं में सिमटती ये यादें ,
वक़्त के पहिये पर झूलती ये यादें ,
कभी जो याद करूँ पिछली उन यादों को ,
तो तरोताज़ा हो जाता है मन तुम्हारी यादों से,
फिर एक फ़िक्र सी होना तुम्हारी ,
पर तुम्हें कुछ न कह पाना ,
पर मन ही मन तुम्हारी सलामती के लिए दुआ करना ,
और फिर तुम्हारी खिलखिलाती आवाज़ को सुनने के लिए बरबस एक ख्याल आना ,
हाँ ये दोस्ती कुछ खास है ,
तुमसे जुड़ा अपनेपन का एहसास है ,
है यही कामना मेरी ,
कि सलामत रहे ये प्यारी सी दोस्ती हमारी ,
गुलज़ार रहे हमारा गुलिस्तान तुम्हारी खिलखिलाती बातों से ,
और न गुमने पाए ये लम्हा जो जुड़ा है तुम्हारे एहसास से ..........

शुक्रिया,
सस्नेह,
निशु गुप्ता 

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