kahi ankahi (कही .... अनकही ..... )
Wednesday, November 14, 2012
सच ....
सच ....
ये किस्सा नहीं कोई बल्कि सोलह आने सच है ,
बहुत ख़ूबसूरत ये इंद्रधनुषी सच है ,
न लापता हो जाए ये स्नेहिल सच है ,
और सच कहे तो ये अपने मन में सजा कर रखने सी अजीज़ है ....
शुक्रिया,
सस्नेह,
निशु गुप्ता
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