तमन्नाओं के सफ़र में वजूद कुछ तमन्नाओं का अलग होता है ,
अपने आप का एहसास भी तब उन तमन्नाओं में धुला होता है,
ये तमन्ना जो दिन के चैन और रात की नींद पर सवार होती है ,
ना मालूम की किस तरह उस तमन्ना को पाने जी जुस्त शुरू होती है ....
शुक्रिया,
सस्नेह,
निशु गुप्ता
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