फ़िक्र क्या जब फ़िक्र फ़िक्र रही ही नही ,
ज़िंदगी में फ़िक्र को तजुर्बे की तरह जब हमने शामिल कर लिया ,
फ़िक्र तब फ़िक्र रही नही और एक सीख दे गई ,
कुछ तजुर्बेकार शख्सियतें रहीं वक़्त क इस समय पर जो फ़िक्र फ़िक्र रही नही ......
शुक्रिया,
सस्नेह,
निशु गुप्ता
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