मौसम आते भी हैं जाते भी हैं ,
कुछ खट्टी - मीठी यादें छोड़ जाते भी हैं
उन पलों पर नाज़ करो ऐ दोस्तों ,
मौसमों की बेरुखी को नासाज़ न करो ऐ दोस्तों ,
क्या रखा है मौसमों की विरासत लड़ने में , इस कंपकंपी के मौसम में चाय और पकौड़ो का मज़ा लो ऐ दोस्तों !!!!!!!!!!
शुक्रिया,
सस्नेह,
निशु गुप्ता
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