मैंने तारे गिने पर सूरज और चाँद तो केवल एक ही था ,
मैंने दिन और रात गिने पर वो हफ्ता , महिना और साल तो एक ही था,
ये सच है कि हम अक्सर हजारों की तलाश में खो जाते हैं ,
पर खुद को जो हमसे जोड़े कोई ऐसा शख्स तो केवल एक ही था ,
इस एक के खेल में मज़ा खूब है ,
कभी हम खुद को और कभी उन को इस खेल का नियम बताते हैं !!!!!!!
शुक्रिया,
सस्नेह,
निशु गुप्ता
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