आँखों के पर्दों या पर्दों की आँखों से।
झीनी सी धूप या धूप के सिरहाने से।
मन एक पतंग हुआ जैसे पतंग ही मन हुआ।
कहीं दूर ले जाए ये मुझे,
ढलते सूरज की बाहों में या पहाड़ों की चोटी पे।
निशु
झीनी सी धूप या धूप के सिरहाने से।
मन एक पतंग हुआ जैसे पतंग ही मन हुआ।
कहीं दूर ले जाए ये मुझे,
ढलते सूरज की बाहों में या पहाड़ों की चोटी पे।
निशु
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