दर्द की आँच पर गमो को उबाल तू
दिल मे ना ज़्यादा वहमो को पाल तू
सामने मन्ज़िल और सुन्हरा आसमान है
काट दे चारो तरफ बुने ये जाल तू
ये जमाना ना तेरे हाथ आयेगा
मदारी बन दिखा कोई कामाल तू
एक छेड है काफी पानी गिराने को
एक पत्थर आसमान की और उछाल तू
नन्हे अंकुर आज नही तो कल निकलेंगे
बस एक लोटा जल इसमे डाल तू
दिल मे ना ज़्यादा वहमो को पाल तू
सामने मन्ज़िल और सुन्हरा आसमान है
काट दे चारो तरफ बुने ये जाल तू
ये जमाना ना तेरे हाथ आयेगा
मदारी बन दिखा कोई कामाल तू
एक छेड है काफी पानी गिराने को
एक पत्थर आसमान की और उछाल तू
नन्हे अंकुर आज नही तो कल निकलेंगे
बस एक लोटा जल इसमे डाल तू
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